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Wednesday, 14 September 2022

आजा - आजा मिलने पहली बारीस में / Aaja Aaja Milne Pahali Baris Mein

 








जितने भी ये बादल है, लगता है सब पागल है -2

बरसाते है याद तेरी और तन्हाई का पल है

बेताब दिल है संग तेरे भिगने के खाईस में

आजा - आजा मिलने पहली बारीस में -4


कभी खतम ना होने वाली, कुछ बातें करनी है

बोली तो दिल की है पर, आँखों से कहनी है

लेके आई हवाएं मुझ तक तेरी ये फरियाद

मैने भी मोहब्बत भेजी है बादलों के हाथ

छोडी है अपनी आरजू तेरी फरमाईस में

आजा - आजा मिलने पहली बारीस में -4


दूरिया सब मिटाके तू जाना आ जाना,

मौसम का भी मिजाज ये कहता है ओ.....

ढूंढता ये दिल मेरा तुझको होके दिवाना,

बस तेरे इंतजार में रहता है ओ......

आने लगा है दिल तेरी आगो की सारीस में

आजा - आजा मिलने पहली बारीस में -4

--------------the end------------------

आजा - आजा मिलने पहली बारीस में


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