ओ देश मेरे, तेरी शान पे सदके
कोई धन है क्या, तेरी धूल से बढके
तेरी धूप से रौशन, तेरी हवा पे जिंदा
तु बाग है मेरा, मैं तेरा परिंदा
है अरजी दिवाने की, जहाँ भोर सुहानी देखी, एक रोज वही मेरी शाम हो
कभी याद करे जो जमाना, माट्टी पे मर मिट जाना, जिक्र में शामिल मेरा नाम हो
ओ देश मेरे, तेरी शान पे सदके
कोई धन है क्या, तेरी धूल से बढके
तेरी धूप से रौशन, तेरी हवा पे जिंदा
तु बाग है मेरा, मैं तेरा परिंदा
आँचल तेरा रहे माँ रंग बिरंगा
ओ ऊँचा आसमा से हो तेरा तिरंगा
जीने की इजाजत देदे, या हुक्म शाहादत देदे, मंजूर हमे जोभी तु चुने
रेशम का हो मधुशाला, या कफन सिपाही वाला, ओढगें हम जोभी तु बुने
ओ देश मेरे, तेरी शान पे सदके
कोई धन है क्या, तेरी धूल से बढके
तेरी धूप से रौशन, तेरी हवा पे जिंदा
तु बाग है मेरा, मैं तेरा परिंदा
------------the end-------------
No comments:
Post a Comment