> ROJ KA GEET: ठहरे हुवे पानी में कंकड़ ना मार / Thahare Huve Pani Mein Kankad Na Mar

Friday, 21 October 2022

ठहरे हुवे पानी में कंकड़ ना मार / Thahare Huve Pani Mein Kankad Na Mar

 









ठहरे हुवे पानी में कंकड़ ना मार सांवरे

मन में हलचल सी मच जाएगी बावरी हो (दोनों पंक्ति दोहराएं)

ठहरे हुवे पानी में...


मेरे लिए है तु अनजानी, तेरे लिए हूँ मैं बेगाना

अनजाने ने बेगाने का, दर्द भला कैसे पहेचाना

जो इस दुनिया ने ना जाना

ठहरे हुवे पानी में कंकड़ ना मार सांवरे

मन में हलचल सी मच जाएगी बावरी हो

ठहरे हुवे पानी में...


सब फूलों के है दिवाने, काटों से दिल कौन लगाएं

भोली सजनी मैं हूँ कांटा, क्यों अपना आँचल उलझाएं

रब तुझको कांटों से बचाएं

ठहरे हुवे पानी में कंकड़ ना मार सांवरे

मन में हलचल सी मच जाएगी बावरी हो

ठहरे हुवे पानी में...


तुम ही बताओं कैसे बसेगी, दिल की अरमानों की बस्ती

ख्वाब अधूरे रह जाएंगे, मिट जाएगी इनकी हस्ती

चलती है क्या वेद पे कस्ती

ठहरे हुवे पानी में कंकड़ ना मार सांवरे

मन में हलचल सी मच जाएगी बावरी हो (दोनों पंक्ति दोहराएं)

ठहरे हुवे पानी में...

-------------------------the end------------------------

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