ओ आये तेरे भवन, दे दे अपनी शरण-2
रहें तुझे में मगन, थाम कर ये चरण
तन मन में भक्ति ज्योत तेरी, हे माता जलती रहे-2
ओ आये तेरे भवन, दे दे अपनी शरण
रहें तुझे में मगन, थाम कर ये चरण
तन मन में भक्ति ज्योत तेरी, हे माता जलती रहे-2
उत्सव मनायें नाचें गाएं-2
चलो मईया के दर जाएं
जय माता दी-जय माता दी
जो से बोलों, जय माता दी
चारों दिशाएं चार खंभे बनी हैं
मंडप पे आसमां के चादर तनी है
सूरज भी किरणों की माला ले आया
कुदरत ने धरती का आंगन सजाया
करके तेरे दर्शन, झुमें धरती गगन
सनन गाएं पवन, सभी तुझमें मगन
तन मन में भक्ति ज्योत तेरी, हे माता जलती रहे
हो तन मन में भक्ति ज्योत तेरी, हे माता जलती रहे
फूलों ने रंगों से रंगोली सजायें-2
सारी धरती ये महकायें
जय माता दी-जय माता दी
जो से बोलों, जय माता दी
चरणों में बहती गंगा की धारा
आरती का दीप लगे हर इक सितारा
पुरवईया देखों चंवर कैसे डोलायें
ऋतुयें भी माता का झुला झुलायें
ओ पाके भक्ति का धन, हुआ पावन ये मन
करके तेरा सुमिरन, खुले अंतर नयन
तन मन में भक्ति ज्योत तेरी, हे माता जलती रहे-2
ओ आये तेरे भवन, दे दे अपनी शरण
रहें तुझे में मगन, थाम कर ये चरण
तन मन में भक्ति ज्योत तेरी, हे माता जलती रहे
हो तन मन में भक्ति ज्योत तेरी, हे माता जलती रहे
-------------------the end----------------------------
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