> ROJ KA GEET: हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद // Ham to hai pardesh mein desh mein nikla hoga chand

Sunday, 20 November 2022

हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद // Ham to hai pardesh mein desh mein nikla hoga chand

 








हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद-2

अपनी रात की छत पर कितना, तन्हा होगा चाँद हो

हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद


जिन आँखों में काजल बनकर, तैरी काली रात हो

जिन आँखों में काजल बनकर, तैरी काली रात

उन आँखों में आंसु का एक, कतरा होगा चाँद हो

हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद


रात ने ऐसा पेच लगाया, टुटी हाथ से डोर हो

रात ने ऐसा पेच लगाया, टुटी हाथ से डोर

आंगन वाले नीम में जाकर, अटका होगा चाँद हो

हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद


चाँद बिना हर दिन यू बिता, जैसे युग बिते हो

चाँद बिना हर दिन यू बिता, जैसे युग बिते

मेरे बिना किस हाल में होगा, कैसा होगा चाँद हो

हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद

अपनी रात की छत पर कितना, तन्हा होगा चाँद हो

हम तो है परदेश में, देश में निकला होगा चाँद

------------------the end---------------------

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