> ROJ KA GEET: हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह // Ham Tere Ganv Mein Aaye Hai Atithi Ki Tarah

Monday, 12 December 2022

हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह // Ham Tere Ganv Mein Aaye Hai Atithi Ki Tarah

 







हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह

सिर्फ एक बार मिलने का मौका दे दे

हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह

सिर्फ एक बार मिलने का मौका दे दे

हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह


मेरी मंजील है कहाँ मेरा ठिकाना है कहाँ

सुबह तक तुझे से बिछड़ कर मुझे जाना है कहाँ

सोचने के लिए एक रात का मौका दे दे

हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह


अपनी आँखों में छुपा रखे है जुगनु मैंने

अपनी पलको पे सजा रखे है आँसु मैंने

मेरी आँखों को भी बरसात का मौका दे दे

हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह


आज की रात मेरा दर्दे मोहब्बत सुनले

कप कपाते हुए होठो की शिकायत सुनले

आज इजहार यादगार का मौका दे दे

हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह


भुलना था तो ये इकरार किया ही क्यों था

बेवफा तुने मुझे प्यार किया ही क्यों था

भुलना था तो ये इकरार किया ही क्यों था

बेवफा तुने मुझे प्यार किया ही क्यों था

सिर्फ दो चार सवालात का मौका दे दे

हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह

सिर्फ एक बार मिलने का मौका दे दे

हम तेरे गाँव में आये है अतिथि की तरह

---------------the end-----------------


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